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Khumar Barabankvi
 
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* दिल को तस्कीन-ए-यार ले डूबी *
दिल को तस्कीन-ए-यार ले डूबी
इस चमन को बहार ले डूबी 

अश्क को पी गए हम उनके हूज़ूर 
आहद-ए-इख्तियार ले डूबी 

इश्क के कारोबार को अक्सर
गर्मिए कारोबार ले डूबी 

तेरे हर मशवरे को ए नाशे
आज फिर आज याद-ए-यार ले डूबी 

हाल-ए-गम उनसे बार-बार कहा
और हँसी बार-बार ले डूबी 

चार दिन का ही साथ था लेकिन
ज़िन्दगी-ए-खुमार ले डूबी
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