donateplease
newsletter
newsletter
rishta online logo
rosemine
Bazme Adab
Google   Site  
Bookmark and Share 
design_poetry
Share on Facebook
 
Kazim Jarwali
 
Share to Aalmi Urdu Ghar
* बात सच्ची हो तो चाहे जिस ज़बा मे बो *
बात सच्ची हो तो चाहे जिस ज़बा मे बोलिये,
फर्क मतलब पर नहीं पड़ता है ख़ालिक़ कि क़सम ।
"माँ के पैरो मे है जन्नत" क़ौल है मासूम का,
मै मुसल्ले पर भी कह सकता हुं “वन्दे मातरम” ।।    --”काज़िम” जरवली
 
Comments


Login

You are Visitor Number : 362