donateplease
newsletter
newsletter
rishta online logo
rosemine
Bazme Adab
Google   Site  
Bookmark and Share 
design_poetry
Share on Facebook
 
Khalil ur Rahman Azmi
 
Share to Aalmi Urdu Ghar
* तुझसे बिछड़ के दिल की सदा कू-ब-कू गई *
तुझसे बिछड़ के दिल की सदा कू-ब-कू गई 
ले आज दर्द-ए-इश्क की भी आबरू गई
 
वो रतजगे रहे न वो नींदों के काफ़िले 
वो शाम-ए-मैकदा वो शब्-ए-मुश्कबू गई
 
दुनिया अजब जगह है कहीं जी बहल न जाए 
तुझसे भी दूर आज तेरी आरज़ू गई 

कितनी अजीब शै थी मगर ख्वाहिश-ए-विसाल 
जो तेरी हो के भी न तेरे रूबरू गई 

रूठी तो खूब रूठी रही हमसे फ़स्ल-ए-गुल 
आई तो फिर निचोड़ के दिल का लहू गई
 
सीना लहुलहान था हर-हर कली का आज
बादे-ए-सबा चमन से बहुत सुर्खरू गई
****
 
Comments


Login

You are Visitor Number : 354