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Khumar Barabankvi
 
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* ऐ मौत उन्हें भुलाए ज़माने गुज़र गç *
ऐ मौत उन्हें भुलाए ज़माने गुज़र गए 
आ जा कि ज़हर खाए ज़माने गुज़र गए 

ओ जाने वाले! आ कि तेरे इंतज़ार में 
रस्ते को घर बनाए ज़माने गुज़र गए 

ग़म है न अब ख़ुशी है न उम्मीद है न यास 
सब से नजात पाए ज़माने गुज़र गए 

क्या लायक़-ए-सितम भी नहीं अब मैं दोस्तों 
पत्थर भी घर में आए ज़माने गुज़र गए 

जाने-बहार फूल नहीं आदमी हूँ मैं 
आ जा कि मुस्कुराए ज़माने गुज़र गए 

क्या-क्या तवक्कोअत थी आहों से ऐ 'ख़ुमार'
यह तीर भी चलाए ज़माने गुज़र गए
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