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Khumar Barabankvi
 
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* वो खफा है तो कोई बात नहीं *
वो खफा है तो कोई बात नहीं
इश्क मोहताज-ए-इल्त्फाक नहीं 

दिल बुझा हो अगर तो दिन भी है रात नहीं
दिन हो रोशन तो रात रात नहीं

दिल-ए-साकी मैं तोड़ू-ए-वाइल
जा मुझे ख्वाइश-ए-नजात नहीं 

ऐसी भूली है कायनात मुझे
जैसे मैं जिस्ब-ए-कायनात नहीं

पीर की बस्ती जा रही है मगर 
सबको ये वहम है कि रात नहीं

मेरे लायक नहीं हयात "ख़ुमार"
और मैं लायक-ए-हयात नहीं
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