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Khurshid Hayat
 
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* मेरी ख़ामोशी में तुम बोलते हो *
मेरी ख़ामोशी में तुम बोलते हो
---खुर्शीद हयात ------
जिंदगी रंग मौसम में
मैं ने !
कभी "तुम " से कुछ नहीं माँगा
खामोश निगाहों की ज़बान
"तुम" तो समझते थे .
ख़ामोशी की यह अदा
तुम्हें पसंद आती गयी
और मेरी चश्म ए तर में
तारे टिमटिमाते रहे
तारों ने जब " कट्टी " की
जुगनू जगमगाते रहे
सूरज जब डूबा
चाँद ने अपनी बाँहें फैलायीं
मैं खुश हूँ
मेरी ख़ामोशी में तुम बोलते हो .
*************
 
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